घुटने की सर्जरी-मिथक एवं सच्चाई

घुटनों की सर्जरी आज बहुत ही सामान्य सर्जरी बन गई है। घुटनों के दम पर ही आपका चलना-फिरना, उठना-बैठना एवं जीवन की ज्यादातर प्रक्रिया निर्भर हैं। इस शल्य चिकित्सा को आर्थोप्लास्टी (arthoplasty) भी कहा जाता है। जिन लोगों के घुटने गठिया (arthritis) के रहते क्षतिग्रस्त हो गए अथवा कोई घुटनों की चोट के कारण घुटने क्षतिग्रस्त है, उन्हे घुटने (Knee Replacement Surgery) सर्जरी से नया जीवन मिलता है।

इस सर्जरी से लाखों लोगों ने घुटनों की पीड़ा से राहत पा कर अपना सामान्य जीवन दर्दरहित व्यतीत करना आरंभ किया है। हाँलाकि कुछ लोगों का मानना है कि छोटी उम्र में घुटनों को बदलने से वह उम्रभर चलने की मोहताज हो जाएँगे या फिर कुछ लोग भ्रमित है ज्यादा उम्र में घुटने की सर्जरी के बाद वह पूरी उम्र निर्भर हो जाएँगे।

डा. तनवीर भुटानी, पंजाब के हड्डी रोग विशेषज्ञ, कुछ भ्रमों और मिथकों एवं उन से जुड़ी वैज्ञानिक सच्चाई के बारे में बताते हैं। ईवा अस्पताल के मुख्य हड्डी रोग चिकित्सक-डा. तनवीर नीचे दिए गए मिथकों की सच्चाई बता रहे हैंः-

मिथक-1

सर्जरी के बाद पूरी तरह से ठीक होने में लंबा समय लगेगा। डा. तनवीर अपने मरीजों को ज्यादातर दूसरे दिन ही चलने की अनुमति दे देतें हैं। सच यह है कि पूरी तरह से ठीक होने में किसी भी सर्जरी के उपरांत लगभग दो-तीन महीने का समय लगता है। उसी तरह घुटनों की सर्जरी में भी तीन महीनों में आप पूर्णतया ठीक होकर सामान्य दिनचर्या में जुट सकते हैं। ध्यान इस बात का रखना ज़रूरी है कि सर्जरी में विलंब करने से घुटनों को ज्यादा क्षतिग्रस्त (Damaged) हालत में न पहुँचने दें।

मिथक-2- यह सर्जरी केवल कुछ सालों के लिए प्रभावी है

कुल घुटने प्रतिस्थापन सर्जरी (Total Knee Replacement Surgery) एवं आंशिक घुटने प्रतिस्थापन सर्जरी (Partial Knee Replacement Surgery) आपका जीवन अगले 15 वर्षों के लिए सुखमय कर देते हैं आपको लगभग 15 सालों के लिए दर्द से राहत मिल जाएगी। केवल कुछ मात्र प्रतिशत लोगों की स्थिति बिगड़ जाने या फिर हड्डियों की खराब शिकायत आने की संभावना है। पर अधिकतर यह सर्जरी आपका लंबे समय तक जीवन सुधार देती है।


मिथक-3- सर्जरी तब करवाएँ जब घुटनों का दर्द असहनीय हो जाए

डा. तनवीर अपने मरीज़ों को हमेशा यह शिक्षा देते हैं दर्द के साथ जीने पर मजबूर ना हों। कुछ मरीज बहुत दर्द सहन कर, जब दर्द असहनीय हो जाता है तो सर्जरी के बारे मे सोचते हैं। इससे केवल घुटनों की स्थिति बद से बदतर हो जाती है। आज के इस तकनीकी युग में दर्द को जीवन का हिस्सा बनाने की आवश्यकता नहीं। घुटने की सर्जरी चिकित्सक के परामर्श से तुरंत करवानी चाहिए। जिससे पुनः अच्छी स्थिति में आने में विलंब न हो।

मिथक-4- छोटी उम्र में घुटना सर्जरी मतलब मुसीबत उम्रभर

डा. तनवीर सभी मरीज़ों को इस सच्चाई का आगाह करवाते हैं कि जितनी जल्दी आप घुटनों की दर्द से राहत चाहते हैं, उतनी ही जल्दी ज्वाइंट रिपलेसमेंट (Joint Replacement) करवाना उचित है। आपने आने वाले 15 से 20 साल हँसते-कूदते दर्द रहित व्यतीत करेंगे। घुटने की सर्जरी और उम्र का कोई संबंध नहीं। घुटने की सर्जरी का सीधा संबंध है आपकी असहाय दर्द और घुटनों की क्षतिग्रस्त हालत।

मिथक-5- बुढ़ापे में घुटना सर्जरी मतलब बुढ़ापा खतरे में

सच्चाई यह है कि घुटना सर्जरी के उपरान्त आपने अपनी उम्र में दर्द रहित कुछ वर्ष जोड़ लिए हैं। यह सर्जरी कामयाब एवं सुरक्षित है। आधुनिक प्रक्रिया से दर्द रहित एवं चिकित्सक की दक्षता से सुरक्षित है घुटना सर्जरी। बुढ़ापे में आप अपने बल पर चलना-फिरना कर सकेंगे अपने नए एवं काबिल घुुटनों के साथ।

मूल शब्द

सन् 1970 से शुरू हुई घुटनों की सर्जरी आज एक दर्दरहित प्रक्रिया बन गई है। अगर आप अपने जीवन में 20 वर्ष साल खुशियों के जोडना चाहते है और घुटनो की दर्द से मुक्ति चाहते हैं और घुटनों की दर्द से मुक्ति चाहते हैं, तो डा. तनवीर भुटानी ईवा अस्पताल से मिलें और जानकारी प्राप्त करें। धीरे-धीरे अपनी गतिविधियाँ बढ़ाएँ और अपने आप को गोल्फ, टेनिस एवं तैराकी करने में सक्षम पाएँ।