स्वतःप्रवर्तित गर्भपात बनाम बांझपन

स्वतः गर्भपात या गर्भस्राव किसी के साथ भी हो सकता है, और अक्सर इसकी तुलना उर्वरता या प्रजनन क्षमता से की जाती है। यह स्वभाविक है। परंतु सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि यह पहली गर्भावस्था है, दूसरा या तीसरा गर्भस्राव है या किसी दुर्घटना का परिणाम है।

गर्भ का प्राकृतिक रूप से गिर जाना माता और पिता दोनों के लिए दर्दनाक होता है। ऊपर से यह चिंता कि इससे उनकी प्रजनन क्षमता या भविष्य के गर्भ तो नहीं प्रभावित होंगे? स्वता गर्भपात होने के बाद आपको अगले बच्चे की योजना कब बनाना चाहिए,

अगले बच्चे की सुरक्षा के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और आप की प्रजनन क्षमता कैसे प्रभावित हो सकती है, यह जानना जरूरी है। आइए, प्रजनन क्षमता और प्राकृतिक गर्भपात के बारे में सभी तथ्यों को जानने की कोशिश करें।

 

स्वतःप्रवर्तित गर्भपात क्या है?

गर्भावस्था के समय से पहले अचानक ही समाप्त होने को गर्भस्राव या स्वतःप्रवर्तित गर्भपात कहते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि लगभग 20% गर्भ स्वयं ही निरस्त हो जाते हैं। यह संख्या इसलिए अधिक है क्योंकि ज्यादातर महिलाओं को पता ही नहीं होता कि उनका गर्भ गिर गया है। पहले दूसरे या तीसरे महीने में जब गर्भपात हो जाता है तो महिलाओं को पता ही नहीं चलता। 80% गर्भपात पहले 3 महीनों के भीतर होते हैं।

 

क्या स्वयं: गर्भपात से बांझपन हो सकता है?

हमारे अस्पताल में आने वाली अधिकांश महिलाएं महिलाओं का पहला प्रश्न यही होता है। क्या गर्भस्राव आगामी गर्भधारण को तो प्रभावित नहीं करेगा? “ज्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता है,”, ईवा आईवीएफ अस्पताल की स्पेशलिस्ट डॉक्टर शिवानी भूटानी कहती हैं।

“यदि आपका भ्रूण पहले 1-3 महीनों में निरस्त होता है, तो अगली गर्भावस्था के प्रभावित होने की संभावना नहीं है।” हालांकि कई बार कुछ बचे-खुचे उत्तकों को डी एंड सी नामक प्रक्रिया के माध्यम से निकालना पड़ सकता है।

जब हम गर्भपात और प्रजनन क्षमता के मुद्दों का आंकलन करते हैं, तो आपको याद रखना चाहिए कि गर्भपात करने से बांझपन नहीं होता। हालांकि यह किसी व्यक्ति के पहले से मौजूद प्रजनन संबंधी कारकों को प्रकट कर सकता है। यदि आपके साथ यह एक से अधिक बार हुआ है तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह करें।

ऐसे कोई प्रमाण सामने नहीं आए हैं कि केवल गर्भस्राव से प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। यह प्रत्येक महिला को अलग तरह से प्रभावित करता है, जिससे निष्कर्ष निकालना मुश्किल हो जाता है। कुछ अध्ययनों में तो यह भी पाया गया कि प्रारंभिक गर्भपात के बाद गर्भाधान आसान हो जाता है। दूसरी तरफ एक और रिपोर्ट आई कि गर्भपात प्रजनन क्षमता में मामूली कमी कर सकता है।

 

प्राकृतिक गर्भपात और पुनः गर्भधारण में कितना अंतर रखना चाहिए?

गर्भस्राव का अनुभव माँ के लिए भावनात्मक और शारीरिक दोनों तरह से बहुत मुश्किल दौर है। इस मुश्किल समय से निकलने में कुछ समय लग सकता। इसलिए अगली गर्भावस्था की योजना सावधानीपूर्वक बनानी चाहिए। डॉ शिवानी सलाह देती हैं कि गर्भपात हो जाने पर गर्भाशय और एंडोमेट्रियम को नॉर्मल होने और संक्रमण से बचाए रखने के लिए अगले 15 दिनों तक महिला को संभोग नहीं करना चाहिए।

जब अगला माहवारी चक्र प्रारंभ हो जाए तो आप गर्भधारण की कोशिश कर सकती हैं क्योंकि आप अगले दस दिनों में ओवुलेट कर रही होंगी। परंतु अगर आप एक महीने तक प्रतीक्षा कर लें तो डिलीवरी की निश्चित तारीख बिना किसी भ्रम के निकाली जा सकती है।

 

दोबारा गर्भपात की क्या संभावना है?

यदि किसी महिला का 2 या इससे अधिक बार सहज गर्भपात हो जाता है, तो इसे आवर्तक गर्भावस्था हानि कहा जाता है। बार-बार गर्भपात का प्रतिशत बहुत कम है, केवल 1 प्रतिशत। इसका मतलब है कि पहली तिमाही में गर्भपात कराने वाली 100 महिलाओं में से केवल एक का दूसरा गर्भपात हो सकता है।

हालांकि, अगर ऐसा होता है, तो अगली गर्भावस्था की योजना बनाने से पहले किसी फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। वह आपके रक्त परीक्षण, सोनोग्राफी परिणाम, हार्मोन के स्तर, एमआरआई या एंडोमेट्रियल बायोप्सी का उपयोग यह मूल्यांकन करके देखेंगी कि शरीर भ्रूण को क्यों अस्वीकार कर रहा है।

बार-बार होने वाली गर्भावस्था का नुकसान आनुवंशिक गुणसूत्र असामान्यता के कारण भी हो सकता है , जो पिता या माता, किसी का भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में माता-पिता के सामान्य होने पर भी शिशु में उनके अंडे या शुक्राणु द्वारा गुणसूत्र असामान्यता स्थापित हो रही है। जेनेटिक स्क्रीनिंग से इस स्थिति का निदान हो सकता है। आप सफल गर्भावस्था के लिए डोनर अंडे या शुक्राणु का उपयोग करके आईवीएफ का विकल्प भी चुन सकती हैं।

 

भविष्य में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

चूंकि असफल गर्भावस्था का कारण सीधे तौर पर प्रजनन क्षमता से संबंधित नहीं है और यह हर मामले में स्पष्ट भी नहीं होता, इसलिए गर्भपात को रोकने के लिए कोई निश्चित सूत्र नहीं हैं। फिर भी, आप आप ऐसी संभावना को कम अवश्य कर सकते हैं।

गर्भवती होने से पहले आहार और जीवनशैली में बदलाव के बारे में अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें, ताकि आप गर्भपात के कारकों को काफी हद तक कम कर सकें। इनमें मुख्य है हैं:

१. फिर से गर्भ धारण करने का प्रयास करने से पहले एक महीने के लिए फोलिक एसिड वाली विटामिन टैबलेट लेना। यह न केवल गर्भपात के जोखिम को कम करती है बल्कि तंत्रिका संबंधी दोषों को भी ठीक करती है।
२. शराब और सिगरेट का सेवन न करें।
३. चाय- कॉफी जैसे कैफीनयुक्त पेय पदार्थों प्रतिबंधित करें। यह आपकी प्रजनन क्षमता और अगली गर्भावस्था दोनों के लिए अच्छा है।
यदि आपने अपने एक शिशु के स्वत: गर्भपात का सामना किया है, तो घबराइए मत। ऐसे और भी कई लोग हैं जिन्हें ऐसे ही अनुभव हुए हैं। आप उनके साथ जुड़ सकते हैं और सहायता हासिल कर सकते हैं। डॉ शिवानी कहती हैं, “हम मरीजों को दूसरे दंपतियों से जुड़ने में मदद करते हैं। उनके और अपने पति या पत्नी के साथ अनुभव शेयर करने से सकारात्मक रहने में मदद मिलती है”।