कूल्हे का प्रत्यारोपण: हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के प्रकार

कूल्हे का प्रत्यारोपण या हिप रिप्लेसमेंट एक बहुत ही सफल आपरेशन है जिसमें कूल्हे के जोड़ के कुछ हिस्सों को कृत्रिम रूप से फिर से बनाया जाता है। कूल्हे के जोड़ को सेहतमंद जोड़ से बदलकर व्यक्ति को नई ज़िदगी प्रदान की जाती है। इसे हिप आर्थ्रोप्लास्टी के रूप में भी जाना जाता है। 

इसमें कूल्हे के जोड़ को फिर से बनाने के लिए जांघ के ऊपर का हिस्सा और फीमर (जांघ की हड्डी) के कुछ हिस्सों को हटाना और बदलना शामिल होता है। यह मुख्य रूप से गठिया से प्रेरित दर्द और अकड़न को दूर करने के लिए किया जाता है। यह रोगी की गतिशीलता में सुधार करता है ताकि वह सामान्य जीवन शैली अपना सके।

हड्डी टूटने, कूल्हे में चोट लगने या कूल्हे की विकास में विकृतियों को ठीक करने के लिए भी प्रत्यारोपण किया जाता है। अगर मरीज गिर गया है और इसके परिणामस्वरूप  उसके कूल्हे में फ्रैक्चर हो गया है तो हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी द्वारा इसका इलाज हो सकता है। आपकी चोट की गंभीरता और हड्डी व जोड़ को हुए नुकसान पर यह निर्भर करेगा की आपको कौन सी प्रक्रिया करवानी चाहिए। 

कूल्हे के जोड़ को बदलने के ऑपरेशन(hip replacement) मुख्यतः 3 प्रकार के होते हैं:

  1. कूल्हों का पूर्ण प्रतिस्थापन- Total hip replacement
  2. आंशिक हिप रिप्लेसमेंट- partial replacement
  3. हिप रिसर्फेसिंग- सिर्फ घिसे हुए हिस्से को बदलना

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संंपूर्ण प्रतिस्थापन

कूल्हे के प्रत्यारोपण का सबसे आम प्रकार टोटल रिप्लेसमेंट है-यानी पूरी तरह से नया जोड़ लगाना। इस सर्जरी में आपके कूल्हे के खराब हो चुके या क्षतिग्रस्त हिस्से को कृत्रिम प्रत्यारोपण से बदल दिया जाता है।

सॉकेट को एक मजबूत प्लास्टिक कप से बदल दिया जाता है, ज्यादातर टाइटेनियम धातु के खोल के साथ। ऊरु सिर को हटा दिया जाता है और एक सिरेमिक या मिश्र धातु की गेंद के साथ फिर से बनाया जाता है जो फीमर के शीर्ष में जाने वाले धातु के तने से जुड़ा होता है।

 

मिनिमली इनवेसिव टोटल हिप रिप्लेसमेंट

जहान कुल हिप रिप्लेसमेंट के पारंपरिक तरीके में कूल्हे के जोड़ को देखने और उस तक पहुंचने के लिए एक लंबा चीरा (कट) लगाया जाता है, वहीं न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी एक अलग दृष्टिकोण का उपयोग करती है। इसमें एक या दो छोटे चीरे लगाए जाते हैं। छोटे चीरे लगाने का उद्देश्य दर्द को कम करना और रिकवरी में तेजी लाना है। 

इस प्रकार के हिप रिप्लेसमेंट में सर्जिकल तकनीक तो समान होती है, लेकिन कूल्हे को घेरने वाले ऊतकों का विच्छेदन कम होता है। उपयोग किए जाने वाले कृत्रिम इम्प्लांट भी वही होते हैं।

लेकिन इसमें विशेषज्ञ सॉकेट और ऊरु सिर को तैयार करने और प्रत्यारोपण को उचित रूप से लगाने के लिए स्पेशल सर्जिकल उपकरणों का उपयोग करता है। इसके लिए सर्जन का अनुभवी होना अति आवश्यक है। 

यह न्यूनतम इनवेसिव तकनीक सभी रोगियों के लिए उपयुक्त नहीं होती। आपका ऑर्थोपेडिक सर्जन आपको आपके के के अनुसार विभिन्न विकल्पों के बारे में सलाह देगा।  

 

पार्शियल/ आंशिक हिप रिप्लेसमेंट

पूरा जोड़ बदलने के बजाय आर्थोपेडिक सर्जन  सिर्फ ऊरु सिर या कटोरी को प्रोस्थेटिक इम्प्लांट से बदल देता है। एसिटाबुलम, जो हिप सॉकेट का कप है, अपरिवर्तित रहता है।

इस विधि को आंशिक प्रतिस्थापन इसलिए कहा जाता है क्योंकि पूरे जोड़ के बजाय केवल जोड़ के क्षतिग्रस्त हिस्सों को बदला जाता है। गठिया के रोगियों के लिए, आंशिक प्रतिस्थापन की कारगर नहीं माना जाता। 

डॉ तनवीर सिंह भूटानी बताते हैं,” चूंकि गठिया कूल्हे के जोड़ के अधिकांश हिस्सों को खराब कर देता है, गठिया के रोगियों को ‌आंशिक प्रतिस्थापन से पूरा लाभ नहीं मिलता। “यदि कोई व्यक्ति गठिया के लक्षण दिखाता है, तो  डॉक्टर संभवतः कुल प्रत्यारोपण का सुझाव देगा।

 

हिप रिसर्फेसिंग

आपका कूल्हा एक बॉल और सॉकेट जॉइंट है जिसमें जांघ का गोल सिर कूल्हे की हड्डी के गोल सॉकेट में फिट हो जाता है। हड्डियों के सुचारू संचलन को सुगम बनाने के लिए सॉकेट में कार्टिलेज होता है।

जब जोड़ क्षतिग्रस्त या विकृत हो जाता है, तो जांघ की हड्डी को हिलाने से घर्षण के कारण दर्द होता है क्योंकि हड्डियाँ आपस में रगड़ती हैं।

रिसर्फेसिंग एक तरह की हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी है जिसमें डॉक्टर जोड़ को बाहर निकालने के लिए एक चीरा लगाता है। उसके बाद वह एक धातु के आवरण के साथ ऊरु सिर को खुरचता है और ढक देता है।

कूल्हे की हड्डी के सॉकेट की खराब हुई हड्डी का एक हिस्सा भी हटा दिया जाता है, इसे धातु संरचना के साथ बहाल करने के लिए।

यह सर्जरी पारंपरिक प्रतिस्थापन गंभीर से अलग है, जहां ऊरु सिर को मरम्मत या ढकने के बजाय पूरी तरह से हटा दिया जाता है। हालांकि, हिप बोन सॉकेट को कुल प्रतिस्थापन के समान बदल दिया जाता है। 

 

आपके लिए कौन सी सर्जरी उपयुक्त है?

आपको किस प्रकार की प्रक्रिया की आवश्यकता है, इसकी पुष्टि करने के लिए सर्जन पहले पूरी स्थिति और क्षति का मूल्यांकन करता है। किस तरह की सर्जरी करनी है इसका मूल्यांकन करने के कई कारक होते हैं:

१) मरीज की दशा-  सर्जन समग्र स्वास्थ्य, असुविधा, दर्द का स्तर, और आप किस प्रकार की विकलांगता का सामना कर रहे हैं, और नियमित कार्यों को करने में कठिनाई के बारे में प्रश्न पूछते हैं।

२) नैदानिक ​​परीक्षण। डॉक्टर आपके कूल्हे की गतिशीलता, गति की सीमा, शक्ति और संरेखण की जांच और मूल्यांकन करते हैं।

३) एक्स-रे-  एक्स-रे इमेजिंग आमतौर पर कूल्हे में क्षति या दोष की भयावहता का आकलन करने के लिए किया जाने वाला पहला परीक्षण है।

४) अन्य परीक्षण। हड्डी, उपास्थि और कोमल ऊतकों को विस्तृत रूप से देखने और विस्तृत आंकलन करने के लिए एमआरआई स्कैन की आवश्यकता होती है।

कूल्हे के प्रत्यारोपण में ईवा अस्पताल की विशेषज्ञता

कूल्हे का सही ना चलना या दर्दनाक होना व्यक्ति को निराश और विकलांग महसूस करवाती है और उसके जीवन की गुणवत्ता बहुत गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। 

आप अपने विशेष मामले पर चर्चा करने के लिए ईवा अस्पताल में हमारे विशेषज्ञों से परामर्श कर सकते हैं। चिकित्सा बीमा और कैशलेस भर्ती की सुविधा भी उपलब्ध है। आप 4-6 दिनों तक अस्पताल में रहेंगे और फिजियोथेरेपी सहायता भी प्राप्त करेंगे।