क्लिकिंग शोल्डर -कंधों से कट-कट की आवाज आना गंभीर विकारों का संकेत हो सकता है

अक्सर हाथ ऊपर उठाने या घुमाने से कंधों से चटकने की या कट-कट की आवाज आती है। इसे बिल्कुल भी हल्के में ना लें। यह एक गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। आवाज के साथ दर्द भी जुड़ा हो सकता है, या नहीं भी। अक्सर हम इसे नजरअंदाज कर देते हैं या फिर थोड़ा आराम और दर्द निवारक दवाएं लेकर भूल जाते हैं। ऐसा बिल्कुल भी ना करें। किसी भी बीमारी को शुरुआती लक्षणों में ही कंट्रोल कर लेना चाहिए नहीं तो आपके कंधों के जोड़ खराब हो सकते हैं।

आइए जानते हैं कि केक इन शोल्डर क्या है और इसका इलाज कैसे करना चाहिए।

इस कट कट की आवाज को डॉक्टरी भाषा में क्रैपीटस कहा जाता है। क्रेपिटस किसी भी जोड़ की उस दशा को कहते हैं जिसमें वह एक क्लिक इन ध्वनि पैदा करते हैं। लेकिन जब यह कंधे में होता है, तो यह कई समस्याओं का संकेत देता है। साधासर यह उन लोगों में होता है जो अपने पेशे में कंधे और उसकी मांसपेशियों का अधिकतम उपयोग करते हैं, जैसे कि खिलाड़ी पेंटर या संगीत वादक।

इसे ओवर यूज़ इंजरी कहते हैं जिसका इलाज एक खेल विशेषज्ञ बेहतर कर सकता है। डॉ तनवीर सिंह भूटानी जो स्वयं खेल और हड्डियों के विशेषज्ञ हैं इसे गंभीर रूप से लेने की सलाह देते हैं। वह कहते हैं,” हो सकता है समस्या अधिक गंभीर ना हो, लेकिन निश्चित रूप से मरीज़ को उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए, वरना जोड़ पर का और अधिक नुकसान हो सकता है”। यह कैसे होता है, और इसके कौन से लक्षण है जिनका तत्काल इलाज जरूरी होता है? यह सब समझने से पहले हमें कंधे के जोड़ की संरचना को समझना जरूरी है।

 

कंधे के जोड़ की संरचना 

मानव कंधे की संरचना काफी पेचीदा एवं अत्यंत प्रभावशाली है। यह मानव शरीर का सबसे अधिक घुमावदार जोड़ है जो गतिविधि की जबरदस्त रेंज प्रदान करता है। दरअसल हमारा कंधा तीन हड्डियों से बना होता है। ऊपरी बांह की हड्डी, कंधे की हड्डी और हंसली। ऊपरी बांह की हड्डी का शीर्ष कंधे के ब्लेड ठेके गोलाकार घेरे में फिट होता है।

इस सॉकेट को ग्लेनोइड कहा जाता है। मांसपेशियां, लिगामेंट, कार्टिलेज और टेंडोन्स का संयोजन बांह की हड्डी को कंधे के सॉकेट में केंद्रित रखता है। इन आंखों को उत्तकों को रोटेटर कफ कहते हैं। यह आपकी बाहों को गतिशीलता, स्थिरता और घुमावदार गति प्रदान करता है। शरीर में अन्य जोड़ों की तुलना में कंधे में क्षति की संभावना अधिक होती है।

 

क्लिपिंग शोल्डर के सामान्य कारण

कंधे से कट कट की आवाज आने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

  • जोड़ों में मौजूद तरल पदार्थों में से गैस निकलने के कारण वायु की पॉकेट बन जाना
  • कंधे की तरल ग्रंथि  ‘बरसा’ में सूजन होना- यह समस्या ज्यादातर खिलाड़ियों में पाई जाती है।
  • किसी चोट, वृद्धावस्था, या ज्यादा काम लेने के कारण कार्टिलेज का फटना।
  • रोटेटर कफ में क्षति के कारण मांसपेशियों और टेंडन को नुकसान पहुंचना
  • कंधा उतरना- यानी बांह की हड्डी का कंधे के सर्किट से खिसक जाना।
  • कार्टिलेज यानी उपास्थियों की अतिवृद्धि या डैमेज होना
  • गठिया के कारण उपाधियों का पतन होना।
  • कंधे का पुराना फ्रैक्चर जो ठीक से ना जुड़ने के कारण घर्षण पैदा करे।

याद रखें, उपरोक्त लक्षणों के साथ पीड़ा हो भी सकती है या नहीं भी। समस्याएं दर्द के साथ हो सकती हैं या नहीं। दोनों ही शब्दों में यह खतरे का संकेत देते हैं। इन संकेतों को अनदेखा करने के क्या परिणाम हो सकते हैं? आइए जानते हैं। 

 

क्लिकिंग को अनदेखा करने के आशंकित परिणाम

कंधे के जोड़ की किट-किट को नजरअंदाज करने का सबसे प्रमुख प्रणाम फ्रोजन शोल्डर हो सकता है। समय के साथ इस जोड़ की संरचना को और नुकसान पहुंचता है, और ये एडहेसिव कैप्सुलिटिस में बदल जाता है- जिसमें जोड़ के ऊतकों में दर्द, सूजन और कठोरता हो जाती है। रोगी के लिए आसान काम करना भी मुश्किल हो जाता है जैसे कि कपड़े पहनना।

 

ऐसे में क्या करें

ऐसी स्थिति में ज्यादातर लोग केवल चिंता करते हैं और इससे ज्यादा कुछ नहीं। जबकि ठीक होने के लिए समय पर चिकित्सा सहायता लेना बहुत महत्वपूर्ण है।

यदि आपको कंधे में दर्द के साथ क्लिकिंग की समस्या है, तो इसे हड्डियों के डाक्टर को दिखाएं।

इसके गंभीर होने की प्रतीक्षा न करें। आप हमारे लुधियाना के क्लिनिक पर कॉल करके डॉ तनवीर भूटानी विशेष परामर्श के लिए समय की नियुक्ति कर सकते हैं। इन्हें ज्वाइंट रिप्लेसमेंट फॉर स्पोर्ट्स इंजरी निपुणता हासिल है।

यदि आपको दर्द या सूजन के लक्षण नहीं हैं, तो आप एक फिजियोथेरेपिस्ट से भी परामर्श कर सकते हैं, हालांकि कोई भी दर्द न होने का ये मतलब नहीं कि समस्या छोटी है। 

वह आपको ऐसे भी अभ्यास और व्यायाम सिखा सकते हैं स्वयं घर पर ही कर सकते हैं। लगातार दर्द, क्लिकिंग, सूजन, और अन्य संकेतों के चलते आप निकटतम ऑर्थो क्लिनिक स तुरंत संपर्क करें।

 

क्रेपिट्स की रोकथाम और कंधे की सुरक्षा

एवा अस्पताल के वरिष्ठ स्पोर्ट्स इंजरी विशेषज्ञ डॉ भूटानी ने विशेष दिशानिर्देश बताये जिन्हें अपनाकर आप अपने कंधे के जोड़ की सुरक्षा कर सकते हैं। इन्हें आप आसानी से अपनी दैनिक गतिविधियों में शामिल कर सकते हैं।

 

काम करते समय :

जो लोग ऑफिस में कार्य करते हैं और अपना अधिकांश समय कंप्यूटर स्क्रीन के आगे बिताते हैं, उन्हें अपने बैठने की अवस्था पर ध्यान देना चाहिए। अपनी पीठ को बिल्कुल सीधा रखें और ऐसी कुर्सी का उपयोग करें जो आपके घुटनों को कूल्हों के साथ समतल रखे।

अपने हाथों को ऐसी स्थिति में न रखें जो कोहनी से ऊपर उठें। कोहनी की तुलना में कलाई निचले स्तर पर होनी चाहिए। लगातार काम ना करें और ब्रेक लेते रहें। बीच-बीच में स्ट्रैचिंग एक्सरसाइज भी करें।

 

जिम और स्विमिंग पूल में:

अपने शरीर के अंगो का हमेशा ध्यान रखें। कोई भी गतिविधि शुरू करने से पहले कंधे की मांसपेशियों का वार्म अप करें ताकि उन्हें झटका ना लगे। स्विमिंग में तितली स्ट्रोक से बचें। फ्रीस्टाइल बेहतर है। बैकस्ट्रोक तो कंधे के जोड़ के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। जिम में बेंच प्रेस करते समय अपने कंधों को चोट से बचाने के लिए कोहनियों को 75 डिग्री के कोण पर रखें।

 

सोते समय सुरक्षा:

सोते समय हम सात या 8 घंटे तक एक ही स्थिति में रहते हैं। यह किसी विशेष मुद्रा में रहने का काफी लंबा अंतराल है। करवट लेकर सोने से कंधों पर अतिरिक्त खिंचाव पड़ता है और भविष्य में परेशानी होती है। कंधों पर अतिरिक्त भार न पड़े इसलिए हमेशा पीठ के बल ही सोएं।

 

अंततः

लंबे समय तक कंधे को ऊपर करके काम करने से उनमें सूजन आ जाती है जिससे आपको क्लिकिग या पीड़ा का अनुभव होता है। यह बाद में गंभीर समस्या का रूप धारण कर लेता है। एक्सपर्ट्स इस बात को मानते हैकिसी भी बीमारी का शीघ्रतम निदान करना और डॉक्टर के निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन करना स्थायी लाभ दिलाता है।